पिछले दिनों हाथरस में एक स्वयंभू बाबा के सत्संग के दौरान हुई भगदड से पता लगता है कि बाबा बनने का सुख क्या होता है। स्वयंभू बाबाओं की एक लिलिस्मी दुनिया होती है जहां वे अपने अंधभक्तों के दु:ख हरते हैं और चमत्कार भी करते हैं।
सनातन धर्म की परंपरा बताती है कि कठिन तपस्या, त्याग, सिद्धि और बलिदान के बाद ही व्यक्ति सिद्ध पुरुष बनता है और मानव कल्याण, धर्म रक्षा व समाज कल्याण में व्यक्ति के योगदान के लिए उसे स्वामी की उपाधि प्रदान की जाती है। ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति करने वाला सिद्ध पुरुष कभी भी अपने लिए आलीशन भवन या सुख सुविधाएं नहीं चाहता है बल्कि उसका त्याग करता है किन्तु कलयुग में सिद्ध पुरुष की परिभाषा पूरी तरह से उलट गयी है क्योंकि अब लग्जरी ही सब कुछ है।
बाबा बनने का सुख
बाबा बनने का सुख आलौकिक है - डिजाइनर कपडे, लग्जरी कारें, 5 स्टार होटल जैसे आश्रम और करोडों अनुयायी जो बाबा को भगवान से कम नहीं मानते हैं। क्या आपने कभी उनकी पोशाक पर गौर किया है - किसी महंगे डिजाइनर द्वारा डिजाइन की गयी लगती है, सिर पर खास तरह की पगडी, गले में हीरे जवाहरात की मालायें, हाथों की सभी उंगलियों में महंगी अंगूठियां आदि पहनी होती है। इसके अलावा बाबा के पास अपनी सुरक्षा के लिए अपनी प्राइवेट आर्मी होती है जिससे वह बाबा नहीं किसी राज्य का राजा नजर आता है।
बाबा जब भी कहीं जाता है तो अनुयायियों की भारी भीड एक झलक पाने को आतुर रहती है, साथ में कारों का लम्बा काफिला भी चलता है जो बाबा के अहंकार को संतुष्ट करता है। भला विलासित पूर्ण जिंदगी किसी अच्छी नहीं लगती।
बाबा बनने का मंत्र
जब व्यक्ति की मानवता, संस्कार, कर्तव्य परायणता समाप्त हो जाती है और उसके अंदर केवल लालच और अहंकार रह जाता है तब कलयुगी बाबा का जन्म होता है। इस तरह के सभी बाबाओं का साधना, वैराग्य, आध्यात्म, जन सेवा से कोई वास्ता नहीं होता है बल्कि उनका एक लक्ष्य होता है - अधिक से अधिक लोगों को मूर्ख बनाते हुए अधिक से अधिक संपत्ति अर्जित करना। इसके लिए वह सभी हथकंडे अपनाये जाते हैं जिन्हें कोई भी कार्पोरेट कंपनी अपने उत्पादों को बेचने के लिए अपनाती है। कार्पोरेट कंपनियों की समान ही इनके भी एजेन्ट्स होते हैं जो लोगों के बीच फैल जाते हैं और फिर बाबा के चमत्कारों का झूठा बखान करते हैं। गरीब और मायूस लोग इनके झांसे में आ जाते हैं और इन बाबाओं को भगवान मानने लगते हैं उन्हें लगता है कि बाबा जी उनके सारे दु:ख और परेशानियों को दूर कर देंगे लेकिन इन भोले-भाले लोगों के दु:ख को कितने दूर होते हैं यह तो कोई नहीं जानता लेकिन पाखंडी बाबाओं की संपत्ति दिनों दिन बढती जाती है।
सत्संग कोई कार्यक्रम न होकर अपनी ताकत दिखाने का तरीका होता है जिसके लिए इन पाखंडी बाबाओं के एजेन्ट गांव-गांव घूमकर लोगों को बहला-फुसलाकर सत्संग में लेकर जाते हैं। यदि आप गौर करेंगे तो पायेंगे कि इनके पास कोई न कोई चमत्कारी शक्ति होती है, हर कोई अपने आप को भगवान का अवतार बताता है और लोगों को चूना लगाने के लिए उसके पास कोई न कोई चमत्कारी या दिव्य वस्तु होती है जिसे वह अपने भक्तों में बांटता है और उनके दुखों को हरने की गारन्टी देता है। सत्संग में भीड के बीच इन बाबाओं के एजेन्ट बैठे होते हैं, एक के बाद एक एजेन्ट खडे होकर बताता है कि कैसे बाबा ने उनके दुखों को हर लिया। कोई तो यहां तक कह देता है कि उसके परिवार में किसी को गंभीर बीमारी थी और बाबा के चमत्कारी या दिव्य जल या फल या किसी अन्य टोटके से उसकी बीमारी पूरी तरह ठीक हो गयी जिसका वह प्रमाण भी दिखाता फिरता है।
बाबा को अपने भक्तों से कोई लेना-देना नहीं होता है उसकी नजर तो उनकी संपत्ति पर रहती है। वे भक्त को इस कदर झांसे में लेते हैं कि बेचारा सामान्य जन अपना खेत या जमीन बाबा को दान कर देता है इतना ही नहीं जब बाबा का तिलिस्म काम नहीं करता है तो उसके गुंडे उस व्यक्ति को इतना प्रताडित करते हैं कि बेचारा भक्त कहीं का नहीं रहता, कभी-कभी तो उसे अपनी जान से हाथ धोना पडता है क्योंकि बाबाओं के आश्रम से भक्तों का गायब होना बहुत सामान्य घटना होती है।
बाबाओं के कुकर्मों से परेशान भक्तों जैसे ही संभलते हैं कोई न कोई नया बाबा पैदा हो जाता है, मार्केट में अनेक प्रकार के बाबा प्रकट होते रहते हैं जेल जाते रहते हैं, जेल जाने वाले ज्यादातर बलात्कारी होते हैं आइये कुछ चर्चित बाबाओं की बात करते हैं जो इस समय जेल की हवा खा रहे हैं।
1. गुरमीत राम रहीम
गुरमीत राम रहीम खुद को रॉक स्टार कहता है उसने अपने भक्तों से लूटे गये पैसों से फिल्में तक बना डाली आजकल अपनी 2 महिला अनुयायियों के साथ बलात्कार करने के पाप में 20 साल की सजा काट रहा है।
2. आसाराम बापू
ये बलात्कारी बाबा महिलाओं पर गंदी नजर रखता था और अपने बेटे के साथ मिलकर उनका योन और मानसिक शोषण करता था, जब इसका असली चेहरा लोगों के सामने आया तो इसके भक्तों का विश्वास ही टूट गया था। मैंने लोगों को इसकी तस्वीरें और अन्य सामग्रियां कूडेदानों में फेंकते और उन्हें जलाते हुए देखा है। ये ढोंगी बाबा भी नाबालिग अनुयायी का बलात्कार करने के जुर्म में जेल में सजा काट रहा है।
3. राधे मां
इस महिला पर लोगों की गोद में बैठकर उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाने का आरोप है फिलहाल इसके आयोजनों पर प्रतिबंद्ध है।
4. संत रामपाल
ये बाबा ख़ुद को कबीर का अवतार बताता है, इसके ऊपर अपने आश्रम में अवैध गतिविधियां करने और हथियार रखने सहित कई गंभीर आरोप हैं। एक केस में इनको आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
5. निर्मल बाबा
इसका फेमस डायलॉग है - कृपा रुकी हुई है। यह अपने अजीबो गरीब तरीकों से लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है। इसके ऊपर टैक्सी चोरी, अंधविश्वास फैलाने, धोखा धडी करने के कई आरोप लगे हैं।
6. स्वामी भीमानंद
यह अपने भक्तों में इच्छाधारी बाबा के नाम से प्रसिद्ध था। इसे दिल्ली पुलिस ने साउथ दिल्ली में सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया था। इनके प्रवचन में एमपी और एमएलए भी आते थे।
ऐसे सैकडों ढोंगी बाबा घूम रहे हैं इसलिए इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।
विश्वास का खेल
चूंकि यह सारा खेल विश्वास पर चलता है इसलिए कुछ समय के लिए व्यक्ति को मानसिक रुप से फायदा होता है जिससे उसके मन का बोझ कुछ हल्का होता है इस कारण उसे लगता है कि बाबा ने उसके दुखों और परेशानियों को दूर कर लिया है। जिसका विश्वास जितना ज्यादा होगा उसे उतना ज्यादा फायदा मिलता है। जिन लोगों को फायदा होता है वे ही इन बाबाओं के असली एजेन्ट होते हैं क्योंकि ये अपने अनुभवों को अन्य लोगों को बताते हैं जिससे इनकी लोकप्रियता बढती जाती है और ये स्वयं को ईश्वर मानने लगते हैं।
बाबाओं को तिलिस्म गरीब लोगों से शुरु होकर पढे-लिखे लोगों और नेताओं तक फैल जाता है, इन पाखंडी बाबाओं की शिकार बनती हैं महिलाएं क्योंकि महिलाएं उनके दावों पर जल्दी विश्वास कर लेती हैं और इन्हें भगवान की तरह पूजने लगती हैं। महिलाओं की बाबा के प्रति अगाढ श्रृद्धा ही कभी-कभी उनकेे जीवन की सबसे बडी भूल बन जाती है जिसका नुकसान उन्हें अपनी इज्जत और जान देकर चुकाना पडता है।
क्यों समय पर नहीं जागता प्रशासन
आपने गौर किया होगा कि जब तक आम नागरिक अपनी जान नहीं गवांता है तब तक सरकार, प्रशासन और मीडिया जागते नहीं हैं। किसी को भी बाबाओं के आलीशान महल, लग्जरी कारें और महंगे शौक दिखायी नहीं देते हैं या यूं कहें कि सभी अपनी आंखे बंद करके रखते हैं। आंखे मूंदने का सबसे बडा कारण है इन बाबाओं की कमाई और तंत्र को मिलने वाला हिस्सा। सोचने वाली बात है कि बिना पुलिस की मंजूरी के इतनी भारी संख्या में भीड कहां से आ जाती है क्या पुलिस प्रशासन को भीड दिखायी नहीं देती है।
सरकारों को चाहिए कि वे इस दिशा में सख्त कदम उठायें जिससे गरीबों के साथ यह खूनी खेल बंद हो सके।
ये लेखक के अपने विचार है।

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