बहुउद्देशीय शिविर में माननीय सतपाल महाराज जी को भेंट की गई “तीलू रौतेली का प्रतिशोध” पुस्तक
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| श्री सतपाल महाराज जी को मेरी पुस्तक “तीलू रौतेली का प्रतिशोध” की प्रति भेंट की |
उत्तराखंड की पावन धरती सदियों से शौर्य, त्याग और संस्कृति की अमर गाथाओं की साक्षी रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बीरोंखाल विकासखंड में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर के अवसर पर लोक निर्माण, सिंचाई, पर्यटन, ग्रामीण निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री तथा चौबट्टाखाल विधानसभा के माननीय विधायक श्री सतपाल महाराज जी को मेरी पुस्तक “तीलू रौतेली का प्रतिशोध” की प्रति भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
यह क्षण मेरे लिए केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की वीरांगना पर आधारित मेरी साहित्यिक साधना को सम्मान मिलने जैसा अनुभव था। शिविर में क्षेत्र की जनता, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया।
इसके अतिरिक्त इस अवसर को मेरे लिए और भी अविस्मरणीय बनाने वाला क्षण वह रहा, जब बहुउद्देशीय शिविर में माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज जी द्वारा मुझे सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान केवल मेरे व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना नहीं, बल्कि ग्रामीण कृषि, स्वरोजगार और प्राकृतिक खेती की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का भी सम्मान है। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में कृषि और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देना न केवल आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि स्थानीय किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
माननीय मंत्री जी के करकमलों से यह सम्मान प्राप्त करना मेरे लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय रहा। इस सम्मान ने मुझे भविष्य में भी कृषि, प्राकृतिक उत्पादन तथा समाजहित से जुड़े कार्यों को और अधिक समर्पण के साथ आगे बढ़ाने की नई ऊर्जा प्रदान की।
तीलू रौतेली की अमर वीरगाथा
मेरी पुस्तक “तीलू रौतेली का प्रतिशोध” उत्तराखंड की महान वीरांगना तीलू रौतेली के अद्भुत साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण पर आधारित है। अल्पायु में ही अपने पिता और भाइयों की शहादत का प्रतिशोध लेने वाली तीलू रौतेली केवल एक योद्धा नहीं थीं, बल्कि नारी शक्ति, आत्मसम्मान और अदम्य साहस की जीवंत प्रतीक थीं।
गढ़वाल की पर्वत श्रृंखलाओं में आज भी उनकी वीरता की गाथाएँ लोकगीतों और जनश्रुतियों के रूप में जीवित हैं। उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी को साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। इस पुस्तक के माध्यम से मेरा प्रयास रहा है कि नई पीढ़ी उत्तराखंड की इस महान वीरांगना के इतिहास और बलिदान से परिचित हो सके।
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सतपाल महाराज जी का प्रेरणादायी व्यक्तित्व
माननीय सतपाल महाराज जी सदैव उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण हेतु सक्रिय रहे हैं। पुस्तक भेंट करते समय उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास और लोकनायकों को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के प्रयासों की सराहना की।
उनके प्रेरणादायी शब्दों ने मुझे भविष्य में भी उत्तराखंड की लोकगाथाओं और वीर चरित्रों पर लेखन जारी रखने के लिए नई ऊर्जा प्रदान की।
इस विशेष अवसर पर उनकी धर्मपत्नी एवं पूर्व विधायक श्रीमती अमृता रावत जी से भी भेंट करने का अवसर प्राप्त हुआ। आत्मीयता के प्रतीक स्वरूप मैंने उन्हें अपने खेत में उगाया गया शुद्ध एवं 100 प्रतिशत प्राकृतिक लहसुन भेंट किया, जिसे उन्होंने अत्यंत स्नेहपूर्वक स्वीकार किया।
लोक संस्कृति और साहित्य का सुंदर संगम
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गढ़वाली लोक गायक श्री अनिल बिष्ट जी से भी भेंट हुई, जो वर्तमान में लोक संस्कृति विभाग में कार्यरत हैं। चूँकि उस समय मेरे पास पुस्तक की केवल एक ही प्रति उपलब्ध थी, इसलिए उन्होंने पुस्तक को डाक द्वारा उनके कार्यालय भेजने का अनुरोध किया।
अनिल बिष्ट जी उत्तराखंड के लोकप्रिय लोक गायकों और गीतकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से गढ़वाल की संस्कृति, लोकभाषा, पहाड़ के जीवन, प्रेम, विरह और सामाजिक भावनाओं को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। उनकी गायकी की विशेषता यह है कि वे पारंपरिक गढ़वाली लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत करते हैं, जिससे युवा पीढ़ी भी लोकसंगीत से गहराई से जुड़ाव महसूस करती है।
उनका चर्चित गीत “देहरादून” विशेष रूप से पलायन और बदलती सामाजिक परिस्थितियों की भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बाँधा समां
बहुउद्देशीय शिविर के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। लोक गायिका पूनम सती, महिमा उनियाल, लोक गायक सौरव मैठाणी, “चक्रव्यूह महाभारत (अभिमन्यु लीला)” प्रस्तुत करने वाले ब्रह्म कमल सांस्कृतिक दल, देव क्रिएशन ग्रुप तथा स्थानीय कलाकार रामचरण निराला ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विकास और जनसेवा का संगम
बहुउद्देशीय शिविर में समाज कल्याण, पंचायती राज, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, जलागम प्रबंधन, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, पशुपालन, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, राजस्व तथा ग्राम्य विकास विभाग सहित अनेक विभागों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहे। इन स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीण जनता को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
आभार
मैं इस अवसर पर बीरोंखाल विकासखंड में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर के आयोजकों, उपस्थित जनप्रतिनिधियों, कलाकारों तथा सभी साहित्यप्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि “तीलू रौतेली का प्रतिशोध” पाठकों को उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगी और वीरांगना तीलू रौतेली की प्रेरणादायी गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचती रहेगी क्योंकि यह पुस्तक केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि
उत्तराखंड की वीरता, अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की जीवंत अभिव्यक्ति है।
बहुत शीघ्र इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद भी पाठकों के लिए उपलब्ध होगा। पुस्तक अमेज़न, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।
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